Accounting तो सभी करते है फिर Business Helpers यानि हमारी सर्विस मे ऐसा क्या अलग

हमारे accountants समय के साथ updated रहते है | GST और Income Tax से जुड़े बदलाव वो अपने आप आपको समय पर बताते है |

इसके अलावा :-

१. आपके सभी GST, TDS, TCS returns समय पर जाएंगे जिससे आपके ब्याज़ और लेट फीस का खर्चा नहीं  होगा |

२. GST की मैचिंग हम समय समय पर करते रहेंगे जिससे अगर आपका कोई इनपुट लेना रह गया है तब उसका फायदा भी आपको मिलेगा |

३. काफी खर्चे जिसका GST फायदा आप नहीं ले रहे या कुछ खर्चे जिसका आप गलत इनपुट लेते है  इनके बारे में भी हम आपको बताते है |

४ . आपकी accounting ज्यादा सही तरीके से होगी जिससे ऑडिट मे आपको दिक्कते नहीं आएँगी |

५ . Accounts सम्बन्धी आपकी परेशानी समय से सुलझेगी |

६ . आप अपने व्यापर पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे|

७ . फुल टाइम अकाउंटेंट से आपको यह सर्विस सस्ती पड़ेगी |

८. समय समय पर हम व्यापर से जुड़े आपको फायदे नुक्सान बताते रहेंगे एवं टैक्स बचाने के सही तरीक़े बताते रहेंगे |

Accounting - करने से ज्यादा समय पर करना जरुरी

आज किसी भी व्यापर को जिसका आयकर अधिनियम के अंदर ऑडिट होता है उसे एकाउंट्स का रख रखाव जरुरी है | हर व्यापारी  समय-समय पर अपना accounting  करता है और साल के अंत में  अपने CA  के पास जाकर अपना ऑडिट करवाता  है |

हर व्यापार जिसका वार्षिक टर्नओवर २० लाख से ज्यादा है वो व्यापारी  GST में खुद को रजिस्टर करके GST  returns भी भरते होंगे |

इसके अलावा समय समय पर हर व्यापारी को टीडीएस/TCS भी काटकर हर माह समय पर सरकार  को पटाना  है और प्रति तीन माह मे  एडवांस टैक्स (इनकम टैक्स )भी पटाना पड़ता  है |

अगर यह  सब समय पर नहीं होते है तो व्यापारी को हर्जाने  के रूप में सरकार  को ब्याज  और पेनल्टी  और Returns delay फाइलिंग फ़ीस भी  पटानी पडती है | काफी व्यापारियों को यह बात तब पता ऑडिट  के समय पता चलती है और तब उन्हें  काफी टैक्स और उसपर ब्याज और लेट फीस पटाना पड़ता है |

अतः यह जरुरी है की आपका काम सही और समय पर हो |

 

GST - व्यापार करने मे बदलाव की जरुरत

GST आने से व्यापार पद्धति में एक क्रांति आयी है | अब कोई भी व्यापारी इसके बिना काम नहीं कर सकता | जैसे हर व्यापारी GST  बिना काम नहीं कर सकता वैसे वो व्यापारी उसके दुसरे व्यापारी के साथ भी काम नहीं कर सकता जो GST नियमो से नहीं चलता  होगा | अतः GST का पालन करना एक जरुरत है |

आज मुख्यतः दो RETURN हर माह जमा करना होता है | इसमें माह की ११ तारीख तक आपको GSTR -1 और २० तारीख तक आपको GSTR -3B जमा करना होता है | समय पर नहीं जमा करने पर दोनों ही RETURNS में सरकार ने लेट फीस लगाने का कानून है | इस समय लेकिन केवल GSTR -3B मई सरकार लेट फीस चार्ज कर रही है |

साथ -साथ इसपर भी १८% से २४% तक ब्याज चार्ज करने का प्रावधान है जिसके लिए व्यापारियों को नोटिस दी जा सकती है |

GST RETURNS - लेट फीस के अलावा अन्य व्यापारिक हानि

जैसा की सबको पता है की ११ एवं २० तारीख GST RETURNS दाखिल की आखरी तारीख है | यहाँ समय पर नहीं भरने से लेट फीस और ब्याज के अतिरिक्त और भी नुक्सान व्यापारी को उठाना पड़ता  है जो उसे सामने-सामने नहीं दिखाई देता |

1 . GST कंप्लायंस मार्किंग - GST DEPARTMENT सभी व्यापारियों को उनके  RETURN फाइल करने के समय और सही फाइलिंग की सजगता अनुसार मार्किंग करता है | अगर आपकी मार्किंग अच्छी है आपको नोटिस और स्क्रूटनी आने के चान्सेस काफी काम हो जाते है और यही अगर आप पटती माह देरी करते है तो आपका नोटिस आने का चांस बढ़ जाता है |

2 . EWAY BILL न GENERATE  होना -  अगर आपका RETURN दो माह से ज्यादा फाइन नहीं हुआ तब सरकार आपका EWAY BILL GENERATION रोक देगी | इससे आप वो कोई भी माल नहीं खरीद पाएंगे जिसमे EWAY लगता है |

3. खरीदार परेशान होगा - आप जब RETURN फाइल करते है तब खरीदार के PORTAL में  उसके नाम पर  आपका बिल दिखता है | अगर यह बिल उसके पोर्टल में  न दिखे तब उसे भी नोटिस जायगी और धीरे धीरे आप पर उसका विश्वास काम होता है और आपको व्यापारिक हानि होती है |

4 . GST नंबर कैंसिल हो सकता है - यदि आप GST RETURN छह माह यानि SIX टैक्स PERIODS तक नहीं भरते तब ASSESSING OFFICER आपका रजिस्ट्रेशन कैंसिल कर सकता है |

अतः यह जरुरी है की हर व्यापारी अपने RETURNS सही समय पर दाखिल करे|

 

INCOME TAX - TDS / TCS PAYMENT / ADVANCE TAX

आयकर अधिनियम से अनुसार ऑडिट होने वाले व्यापरियों को TDS / TCS काटने की जिम्मेदारी होती है और उसके बाद अगले  माह की प्रति 7 तारीख तक उसका चालान पटाना पड़ता है | उसके बाद प्रति QUARTER यानि तीन माह में उसका भी RETURN फाइल होता है |

यह समय पर नहीं करने पर १.५% प्रति माह के हिसाब से ब्याज और RS . 200 प्रति दिन का लेट फ़ीस सरकार को पटाना पड़ता है |

ADVANCE TAX आपके आयकर की राशि  है जिसके गड़ना करके प्रति तीन माह में  उसका भी चालान पटाना पडता है | ऐसा नहीं करने पर उसपर भी ब्याज लगता है और हमें पता भी नहीं चलता | हम उसे टैक्स समझकर पता देते है |

यह जरुरी है की यह सभी काम आप समय पर करें |